Tuesday, June 28, 2022
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वाराणसी : जिला जज की अदालत में ज्ञानवापी मामले की हुई सुनवाई, फैसला रखा सुरक्षित

वाराणसी। वाराणसी की जिला जज में सोमवार को ज्ञानवापी मामले की सुनवाई शुरू हुई। दोनों पक्षों ने बारी-बारी से अपनी बातों को रखा। जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में करीब 45 मिनट तक सुनवाई चली। फैसला मंगलवार को सुनाया जाएगा। इस दौरान दोनों पक्षों के 19 वकीलों और चार याचिकाकर्ता कोर्ट रूम में मौजूद रहे।

सिविल जज की अदालत से सभी फाइलें जिला जज की अदालत में पहुंच गई हैं लेकिन अभी फाइलों को देखा नहीं जा सका है। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी तरफ से मांगें रखीं लेकिन अदालत ने कोई फैसला नहीं देते हुए कल तक के लिए सुनवाई टाल दी है। अदालत अब कल इस बात पर सुनवाई करेगी कि किन मुद्दों पर पहले सुनवाई होगी। मुख्य रूप से जिला जज की अदालत कल यह फैसला करेगी कि पहले याचिका की पोषणीयता के मुकदमे की सुनवाई हो या श्रृंगार गौरी प्रकरण में आईं आपत्तियों को पहले सुना जाए।

मुस्लिम पक्ष चाहता था कि पहले पोषणीयता यानी 711 (उपासना स्थल एक्ट) पर सुनवाई हो। जबकि हिन्दू पक्ष चाहता था कि अन्य के साथ ही उसकी सुनवाई हो। विष्णु जैन के अनुसार अदालत कल यह तय करेगा कि इस केस का प्रोसिजर क्या होगा। हमने कमीशन की रिपोर्ट मांगी थी। विपक्ष ने आर्डर 711 की सुनवाई पहले की जाए। जबकि हमने आर्डर 26 को 711 के साथ पढ़े जाने की मांग की थी। जबकि विपक्षी चाहते थे कि उसे अलग से पढ़ा जाए।

कोर्ट ने पूरे मामले को सुनने के बाद कल दोपहर 2 बजे तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस केस में अन्य पूरक याचिकाओं पर भी अदालत ने मंगलवार को विचार करने का फैसला लिया है। मंगलवार को अदालत की ओर से बताया जाएगा कि इस मामले की सुनवाई की क्या प्रक्रिया होगी। इसके अलावा सुनवाई की अगली तारीख के बारे में भी बताया जाएगा। हिंदू पक्ष ने अदालत से कमीशन की रिपोर्ट, वीडियो और फोटो की मांग की है।

इससे पहले अदालत की सुनवाई शुरू होने से पहले कोर्ट रूम के बाहर काफी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गयी थी। रस्सी की बैरिकेडिंग कर केवल पक्षकारों व अधिवक्ताओं को ही अंदर जाने की अनुमति मिली। यहां तक की सर्वे के लिए पहले नियुक्त किये गए कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्र का नाम लिस्ट में नहीं होने पर लौटाया गया। अजय मिश्रा को पिछली सुनवाई के दौरान कमिश्नर के पद से हटा दिया गया था। कोर्ट के अंदर जाने के लिए जज की ओर से एक सूची पुलिस को दी गई है। इसी सूची के आधार पर वहां प्रवेश दिया गया।

 

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