Tuesday, August 16, 2022
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ED को गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करने का अधिकारः सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के विभिन्न प्रावधानों की संवैधानिकता चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाया। अदालत ने PMLA के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) को मिले गिरफ्तारी के अधिकार को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करना मनमानी नहीं है। कोर्ट ने PMLA के उन प्रावधानों की वैधता को कायम रखा है, जिनके खिलाफ आपत्तियां लगाई गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने PMLA को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिंदबरम, महाराष्‍ट्र सरकार के पूर्व मंत्री अनिल देशमुख, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती समेत 242 याचिकाकर्ताओं ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (PMLA) ) के तहत ED द्वारा की गई गिरफ्तारी, जब्ती और जांच की प्रक्रिया को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं की एक और मांग पर अदालत ने कहा कि ईडी ने कोई शिकायत दर्ज की है तो उसकी कॉपी आरोपी को देना जरूरी नहीं है। इसके अलावा सीबीआई या अन्य किसी एजेंसी की ओर से बंद किए गए मामले को भी ईडी अपने हाथ में लेकर जांच कर सकती है। इसके अलावा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट ((PMLA) ) में मनी बिल के तहत बदलाव किए जाने के सवाल को अदालत ने 7 जजों की बेंच के सामने भेजने का फैसला लिया है। दायर की गई याचिकाओं में ईडी की ओर से रेड, गिरफ्तारी के अधिकारी, संपत्ति को जब्च करने और बेल की कठिन शर्तों पर विचार करने की अपील की गई थी।

जस्टिस ए.एम खानविल्कर की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि ईडी की ओर से गिरफ्तारी किया जाना मनमानी नहीं है। अदालत ने ईडी ओर से संपत्ति जब्त करने को सही करार देते हुए कहा कि गलत ढंग से पैसा कमाने वाले लोग इसका इस्तेमाल न कर सकें। इसलिए ऐसा अधिकार ईडी के पास है। जमानत की दो कड़ी शर्तों को भी सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत आरोपी को दो शर्तों पर ही बेल मिलती है। ये शर्तें हैं कि मामले में दोषी न होने के समर्थन में कुछ सबूत मिलें और यह भरोसा हो कि आरोपी निकलने के बाद कोई दूसरा अपराध नहीं करेगा।

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