कोरोना के डर और बिकवाली के दबाव में आया शेयर बाजार

नई दिल्ली । कारोबार के लिहाज से भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला सप्ताह लगातार उतार चढ़ावा वाला सप्ताह बना रहा। देश के कई हिस्सों में कोरोना संक्रमण के कारण लागू की गई पाबंदियों, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में आई गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा बिकवाली कर अपने पैसे को निकालने के कारण शेयर बाजार लगातार उतार चढ़ाव का सामना करता रहा।
16 अप्रैल को खत्म हुए पिछले कारोबारी सप्ताह में बीएसई सेंसेक्स में 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी में भी 1.4 फीसदी की गिरावट दिखी। इसी सप्ताह के दौरान बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 2.9 फीसदी और बीएसई स्मॉल कैप इंडेक्स में 2.6 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली।
पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान बीएसई इंडेक्स के 13 ऐसे स्टॉक्स रहे, जिनमें जोरदार गिरावट का रुख बना रहा। इन स्टॉक्स में एनबीसीसी, आरबीएल बैंक, लेमन ट्री, बंधन बैंक, इंडिया सीमेंट्स और क्वेस कॉर्प जैसे शेयर शामिल हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो बंधन बैंक में 10.22 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। वहीं एनबीसीसी में 10.50 फीसदी, इंडिया सीमेंट्स में 10.57 फीसदी, आरबीएल बैंक में 11.04 फीसदी, क्वेस कॉर्प में 11.25 फीसदी और लेमन ट्री में 14.69 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
इनके अलावा इंडियाबुल्स हाउसिंग, इंडियन बैंक, आईटीडीसी, महेंद्रा एंड महेंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, इंडियन होटल्स और बीएचईएल ऐसे स्टॉक्स रहे, जिसमें पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान 10 फीसदी या उससे अधिक की गिरावट नजर आई।
इसी तरह विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान भारी बिकवाली कर भारतीय शेयर बाजार से करीब 2600 करोड़ रुपये की निकासी कर ली। इसी तरह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) अप्रैल के महीने में लगातार बिकवाली करते रहे। जबकि इसके पूर्व वे बाजार में ठीक-ठाक खरीदारी कर रहे थे। माना जा रहा है कि एफआईआई और एफपीआई के भारत के शेयर बाजार से पैसे की निकासी की बड़ी वजह कोरोना संक्रमण में आई तेजी है।
कोटक सिक्योरिटीज के धीमेश शाह का मानना है कि इस बात की उम्मीद की जा रही है कि जैसे ही देश में कोरोना वैक्सीनेशन का काम पूरी क्षमता के साथ चलने लगेगा और स्थितियां नियंत्रित होने लगेंगी, वैसे-वैसे शेयर बाजार की स्थिति भी सुधरती जाएगी। इसलिए अभी के उतार चढ़ाव वाले माहौल में निवेशकों को संभल कर निवेश करने का जोखिम लेना चाहिए। अगर अभी पैसा लगाना जरूरी लगे तो निवेशकों को ब्लू चिप कंपनियों के साथ जाने का विकल्प अपनाना चाहिए।