मोदी सरकार आज से बेच रही सस्ता सोना, जानिए स्कीम के बारे में सब कुछ

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2021-22 (SGB 2021-22)  की नौंवी सीरीज के लिए सब्सक्रिप्शन खुल गया है।  निवेशकों के पास गोल्ड बॉन्ड स्कीम में 14 जनवरी तक निवेश का मौका है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इस बार SGB का रेट 4786 रुपए प्रति ग्राम तय किया है.
 
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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2021-22 (SGB 2021-22) 

नई दिल्ली। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2021-22 (SGB 2021-22)  की नौंवी सीरीज के लिए सब्सक्रिप्शन खुल गया है।  निवेशकों के पास गोल्ड बॉन्ड स्कीम में 14 जनवरी तक निवेश का मौका है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इस बार SGB का रेट 4786 रुपए प्रति ग्राम तय किया है. पिछले सीरीज के मुकाबले यह 5 रुपए कम है। अगर इसमें ऑनलाइन निवेश करते हैं तो 50 रुपए प्रति ग्राम की छूट अलग से मिलेगी। डिजिटल भुगतान करने वाले निवेशकों के लिए बॉन्ड की कीमत 4736 रुपए प्रति ग्राम तय की गई है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में एक वित्त वर्ष में एक व्यक्ति कम से कम 1 ग्राम और अधिकतम 4 किलोग्राम सोना खरीद सकता है. वहीं HUF (हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली) 4 किलोग्राम और ट्रस्ट 20 किलोग्राम तक गोल्ड बॉन्ड खरीद सकते हैं. सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड के निवेशकों को हर साल 2.5 फीसदी की सालाना दर से ब्‍याज मिलेगा. यह ब्‍याज छमाही आधार पर मिलेगा. रिडम्पशन पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा. इसका इस्तेमाल लोन के लिए कोलैट्रल के रूप में भी किया जा सकता है.

जीएसटी और मेकिंग चार्ज का झंझट नहीं
गोल्ड बॉन्ड फिजिकल गोल्ड नहीं होता है, ऐसे में इसके स्टोरेज में कोई परेशानी नहीं होती है. इसे एक्सचेंजों पर ट्रेड किया जा सकता है, साथ ही फिजिकल गोल्ड के उलट इस पर कोई GST और मेकिंग चार्ज भी नहीं लगता है. बॉन्ड डायरेक्ट या शेड्यूल्ड प्राइवेट बैंकों, नामित डाकघरों, शेड्यूल्ड विदेशी बैंकों, सरकारी बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL) और लाइसेंस प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के एजेंटों के जरिए खरीदे जा सकते हैं.

8 सालों की मैच्योरिटी होती है
गोल्ड बॉन्ड में सोने की शुद्धता की पूरी गारंटी मिलती है. आपको 24 कैरेट सोने की कीमत मैच्योरिटी पर मिलेगी इसका गारंटी भारत सरकार देती है. यह बॉन्ड 8 सालों का होता है. टैक्स की बात करें तो 8 साल के बाद बॉन्ड से मिली रकम पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है.

5 सालों के बाद होता है एग्जिट का विकल्प
जैसा कि बताया गया है यह बॉन्ड 8 साल बाद मैच्योर होता है, हालांकि 5 साल बाद एग्जिट का विकल्प होता है. मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड बेचने पर ट्रांजैक्शन चार्जेज ज्यादा हैं. कुल मिलाकर सोने में निवेश का यह शानदार विकल्प है. इसमें 24 कैरेट गोल्ड का सरकारी भरोसा होता है. सुरक्षा को लेकर चिंता नहीं है. मैच्योरिटी तक फिक्स्ड इंट्रेस्ट इनकम है और मैच्योरिटी हो जाने पर उस समय की कीमत के हिसाब से फायदा मिलेगा. कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं है.